आदमियों पर अदालत में मुकदमा था। मजिस्ट्रेट ने पूछा कि भई, बताओ भी तो, झगड़ा किसलिए हुआ? मार-पीट किसलिए हुई? सिर कैसे खुल गए, लहू कैसे बह गया? और तुम दोनों पुराने दोस्त हो! तो वे दोनों एक-दूसरे से कहें कि भइया, तू बता

 दो आदमियों पर अदालत में मुकदमा था। मजिस्ट्रेट ने पूछा कि भई, बताओ भी तो, झगड़ा किसलिए हुआ? मार-पीट किसलिए हुई? सिर कैसे खुल गए, लहू कैसे बह गया? और तुम दोनों पुराने दोस्त हो! तो वे दोनों एक-दूसरे से कहें कि भइया, तू बता दे! मजिस्टेट ने कहा, बताते क्यों नहीं, कोई भी शुरू करो!

उन्होंने कहा: अब बताएं क्या आपको, बताने को कुछ हो तो बताएं। जो सजा आपको देना हो दे दो, मगर हमारी बेइज्जती और न करवाओ। अदालत में भीड़ लगी थी, पूरा गांव इकट्ठा हुआ था। मगर मजिस्टेट ने कहा: सजा कैसे दे दें, पहले मुझे पता होना चाहिए झगड़ा किस कारण हुआ। बामुश्किल एक राजी हुआ, उसने कहा कि झगड़ा ऐसा हुआ कि हम दोनों नदी की रेत में बैठे हुए थे, गपशप कर रहे थे कि इसने कहा कि मैं एक भैंस खरीद रहा हूं। मैंने कहा कि भैया, तू देख, भैंस मत खरीद! क्योंकि में एक खेत खरीद रहा हूं। अपनी पुरानी दोस्ती है, किसी दिन तेरी भैंस हमारे खेत में घुस गई, झगड़ा हो जाएगा, नाहक झगड़ा हो जाएगा। और मैंने खेत खरीदना पक्का ही कर लिया है, बयाना भी दे दिया है। इसने कहा कि बयाना मैं भी दे चुका। भैंस तो खरीदी जाएगी! तो मैंने इससे कहा, फिर ख्याल रख, भूल कर भी तेरी भैंस मेरे खेत में नहीं घुसनी चाहिए। तो यह बोला कि भैंस तो भैंस, कोई दिन भर हम उसके पीछे थोड़े ही घूमते रहेंगे! और भी तो काम हैं दुनिया में। और भैंस हैं, कभी घुस भी जाए तो घुस सकती है। तो मैंने कहा: अगर भैंस खेत में घुसी तो ठीक नहीं होगा। तो यह बोला, क्या कर लेगा? मैंने कहा: घुसा कर दिखा भैंस! सो बात इतनी बढ़ गई कि मैंने वहां रेत पर अंगुली से खींच कर अपना खेत बना दिया कि यह रहा मेरा खेत, और इस दुष्ट ने अपनी अंगुली से भैंस घुसा दी। बस, मारा-पीटी हो गई। इसलिए हम संकोच भी कर रहे हैं कि अब कहना क्या! न खेत है, न भैंस है, मगर हमारे सिर खुल गए!


ऐसी ही हालत है। जिन खेलों में तुम उलझे हो, न खेत है, न भैंस है, मगर सिर खुले जा रहे हैं। लड़े-झगड़े जा रहे हो। कितना उपद्रव मचा हुआ है! सदियों से मचा हुआ है! बढ़ता ही जाता है। सघन होता जाता है। आदमी आदमी से लड़ रहा है, जातियां जातियों से लड़ रही हैं, राष्ट राष्टरें से लड़ रहे हैं। किसलिए? कोई एक बार सोचे तो! सारे झगड़े के पीछे अहंकार है..मेरा खेत! और तेरी क्या हैसियत कि भैंस घुसा दे! और उसने कहा कि मेरी भैंस! तू है कौन, तेरा खेत है क्या! अरे, भैंस घुसेगी,

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