बुद्ध वाणी

 बुद्ध वाणी :-

मृत्यु ही इस संसार का अंतिम सत्य :- एक दिन महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे हुए थे। एक महिला विलाप करते हुए उनके पास पहुंची। उसकी गोद में उसके मृत पुत्र का शव था। उस महिला ने महात्मा बुद्ध से अनुरोध किया, महाराज, आप तो सर्वशक्तिमान हैं। साक्षात भगवान हैं। मैं अपने एकमात्र पुत्र की मृत्यु के कारण अकेली हो गई हूं। आप इसे जीवित कर दें, तो मेरा जीवन इसे पालने-पोसने में बीत जाएगा। बुद्ध ने महिला से कहा, तुम किसी ऐसे घर की एक मुट्ठी मिट्टी लेकर आओ, जिस घर का कोई व्यक्ति काल का शिकार न हुआ हो। उस मिट्टी के बल पर मैं तुम्हारे पुत्र को जीवित कर दूंगा। महिला नगर की तरफ भागी। रास्ते में जो भी घर मिलता, वहां जाती और मृत्यु के बारे में पूछती। नगर का पूरा चक्कर लगाने के बाद भी उसे एक भी ऐसा घर नहीं मिला, जिसका कोई व्यक्ति कभी नहीं मरा हो। वह निराश होकर फिर महात्मा बुद्ध के पास पहुंची और बोली, महात्मन, मुझे तो एक भी घर ऐसा नहीं मिला, जिसका कोई व्यक्ति न मरा हो। बुद्ध ने तब उसे उपदेश दिया, इस चराचर जगत में मृत्यु अनिवार्य है। इससे कोई नहीं बचा है। ये शब्द सुनते ही उस महिला को बोध हो गया और पुत्र की मृत्यु पर उसने संतोष कर लिया।

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