एक मात्र कल्पना है कि ध्यान में डूबने पर ऐसा होगा, वैसा होगा.......जो ध्यान को यथार्थ में उतार लेता है वो व्यक्ति असामान्य हो जाता है, वो अलग सा दिखता है भीड़ से जैसे हमारे सांसारिक समझदारो से एक पागल भिन्न सा दिखाई देता है.......जबकि जो आध्यात्मिक क्षेत्र के समझदार होते हैं वो उसे पहचान पाने की क्षमता रखते हैं......!!
ध्यान.........
एक मात्र कल्पना है कि ध्यान में डूबने पर ऐसा होगा, वैसा होगा.......जो ध्यान को यथार्थ में उतार लेता है वो व्यक्ति असामान्य हो जाता है, वो अलग सा दिखता है भीड़ से जैसे हमारे सांसारिक समझदारो से एक पागल भिन्न सा दिखाई देता है.......जबकि जो आध्यात्मिक क्षेत्र के समझदार होते हैं वो उसे पहचान पाने की क्षमता रखते हैं......!!
बहुत लोग जो ध्यान में बैठते हैं उन्हें ये तक पता नहीं होता कि ध्यान करना है या ध्यान में बैठना है या ध्यान में होना है.......ध्यान का अभिनय करना...ध्यान मुद्रा में फोटोग्राफी करवाना.....ये स्वयं को धोखा देने जैसा है......
#ध्यान एक विशुद्ध व्यक्तिगत अवस्था है-------इस संसार के माध्यम से इसी संसार को समझने की प्रक्रिया ही तो ध्यान है, अस्तित्व और स्वयं को समझने का ही तो नाम ध्यान है....हमारा मात्र होना साक्षी( किसी भी व्यक्ति, वस्तु,स्थान,भाव के प्रति judgemental नही होना.... ऐसा सरल से अर्थ में समझने का प्रयास करें) होकर पहचान लेते हैं तो ध्यान फलित हो जाता है.... .ध्यान की विधियाँ सुविधा है जैसे रास्ते की डामरीकरण.........और कोई विधि नहीं है ध्यान की........जिस भी तरीके से आप एकाग्रता साध लेते हैं वही आपकी विधि है......कोई दूसरा आपको ध्यान करवाये कोई विशेष विधि से तो वो ध्यान नहीं बल्कि #सम्मोहन है.....किसी चीज से बंधना ध्यान नहीं है........बल्कि हर विधि से मुक्त होना ध्यान है.........हमेशा इस बात को याद रखने योग्य है कि ध्यान नितांत व्यक्तिगत मामला है.....
कोई महान कार्य नही कर रहे अगर आप ध्यान करते है..........सहज रहिये........ Normal रहिये......😁😁😁😁😁 ध्यान के बहुत विस्तृत रूप हैं....!
अब एक समस्या ये आ रही कि 😂😂😂😂
पड़ोसन भी कब कपड़े सूखाने ऊपर आती है रोज उसी समय छत पर जाने के बहाने ढूंढना भी ध्यान में ही माना जाये ...😂😀या नही
कृपया कमजोर दिल वाले last paragraph ना पढे.....
प्रेम अरूणा
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