प्रेम ही आँख हैं.. 💕🌸💕

 प्रेम ही आँख हैं.. 💕🌸💕


सुंदर कोई नहीं होता है, न कोई असुंदर होता है। जिस पर हमारी प्रेम की आंख पड़ जाती है उसमें सौंदर्य दिखाई पड़ने लगता है। लोग कहते हैं, सुंदर को हम प्रेम करते हैं, गलत कहते हैं, उलटा कहते हैं। जिसे हम प्रेम करते हैं वह सुंदर दिखाई पड़ने लगता है। जिसे हम प्रेम नहीं करते वह असुंदर दिखाई पड़ने लगता है। जिसे आज प्रेम करते हैं वह आज सुंदर दिखाई पड़ता है, कल अगर प्रेम तिरोहित हो जाए तो वही असुंदर भी दिखाई पड़ने लगता है, वही। प्रेम की एक आंख है जब हम एक व्यक्ति को प्रेम की आंख से देखते हैं तो वह व्यक्ति साधारण नहीं रह जाता, वह व्यक्ति एकदम असाधारण हो जाता है। जब हम एक व्यक्ति में प्रेम से झांकते हैं तो एक व्यक्ति में परमात्मा मिल जाता है। और जब हम समस्त जगत में, अस्तित्व में प्रेम से झांकते हैं तो समस्त अस्तित्व में परमात्मा मिल जाता है। जिसे परमात्मा को खोजना है उसके लिए तो प्रेम ही आंख है।


ओशो ❤❤


प्रेम दर्शन

(प्रवचन-04)

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