जब ओशो से पूछा गया आप ‘कुरान’ पर क्यों कुछ नहीं बोलते?

 जब ओशो से पूछा गया आप ‘कुरान’ पर क्यों कुछ नहीं बोलते?



ओशो

एक बार ओशो से किसी ने पूछा कि वो भारत और दुनिया के समस्त धर्मग्रंथों, संतों, महात्माओं पर बोल चुके हैं और उपलब्ध ज्ञान की नए सन्दर्भों में व्याख्या कर चुके हैं पर उन्होंने अभी तक कुरान पर कुछ क्यों नहीं बोला?


क्या कहा ओशो ने?

ओशो ने जो जवाब दिया वो सुनने और मनन करने लायक है, उन्होंने कहा कि वो सिर्फ उन्हीं के बारे में बोल सकते हैं जो बदलने के लिए तैयार हैं, जो खुद को गलत मान सकते हैं या ये कह सकते हैं कि किताब में जो भी लिखा हो मगर हम नहीं जानते तो हमारे लिए काला अक्षर भैंस बराबर है और किसी मुफ़्ती, मौलवी की व्याख्या रटे-रटाये प्रवचन से ज़्यादा कुछ ना होगी।


ये बात आज की सारी लड़ाई का सार है। इस देश में हिन्दू देवी-देवताओं का कितना अपमान हुआ है लेकिन इतनी नौबत नहीं आई कि कोई तलवार लेकर घोड़े पर चढ़ जाए और लोगों के सर कलम कर दे। इतने बड़े देश में ये सब चलता रहता है और किसी निरक्षर, निर्बुद्धि आदमी के कुछ बोल देने से सच्चाई नहीं बदल जाएगी? 


सच, सच होता हो

मैं ये कहूं कि कुरान में रत्ती भर सच्चाई नहीं है, तो क्या सच मान लिया जाएगा? सत्य अकाट्य है, वो अपनी जगह खड़ा है. जो आंखें बंद करके उसे नज़रंदाज़ करते हैं, करते रहें, उसके लिए इतनी मारामारी क्यों?


दरअसल ये लड़ाई धर्म की लड़ाई है ही नहीं, ये लड़ाई संशोधन के लिए तैयार और अपनी मान्यताओं में जकड़ी रहने वाली संस्कृतियों के बीच की है, कुरान ज्ञान का कोई अंतिम स्त्रोत नहीं है।


हमें दरअसल इस बात पर बहस नहीं करनी चाहिए, इस दुनिया में कोई ज्ञान सर्वोच्च नहीं है। कुछ बातें जो प्रकांड पंडित बड़ी मशक्कत के बाद नहीं समझा पाते वो इंसान को सहज ही महसूस हो जाती हैं। ईसा ने कहा है, जो बच्चे जैसे होंगे उन्हें ईश्वर के साम्राज्य में प्रवेश मिलेगा।


पैगम्बर मुहम्मद को भी बच्चे जैसा होने के कारण ही इस ज्ञान की आमद हुई, जटिल होना मर जाना है। ज्ञान का अनुसन्धान ही कहीं पहुंचा सकता है।


धर्मों को नीचा दिखाने के लिए लाख कुतर्क दिए जा सकते हैं. पौराणिक ग्रंथों में लिखी गई कहानियों में हज़ार बुराइयाँ हो सकती हैं. मगर वो इशारा भर हैं. ताकि जीवन वहां से शुरू हो सकते जहाँ पीछे वालों ने छोड़ा है. मगर जो धर्म के लिए शहर को सहरा बना कर वहां ईश्वर का सन्देश सुनना चाहते हैं, उनके हाथ बस रेत लगेगी. 

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