दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी।
🌹 !! ओशो प्रेम !! नमन!! 🌹कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी,
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी।
साधारण प्रेम में यह हो जाता है। कोई किसी स्त्री के प्रेम में पड़ गया, कोई किसी पुरुष के प्रेम में पड़ गया, साधारण प्रेम में यह हो जाता है--
कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी,
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी।
तो उस परम प्यारे के साथ तुम संबंध जोड़ोगे तो तुम सोचते हो प्रमाण न मिलेंगे?
हजार-हजार प्रमाण मिलेंगे। झनझना उठेंगे प्राणों के तार।
गीत उभरने लगेंगे।
नृत्य उठेगा।
तुम्हारी आंखों से रोशनी झरने लगेगी।
तुम्हारे प्राणों में एक अपूर्व शीतलता का जन्म होगा।
तुम नये हो जाओगे।
तुम्हारा पुनर्जन्म होगा।
तुम जीवन की शाश्वतता को देखोगे फिर। जन्म और मरण के बीच घिरे हुए इस छोटे से क्षणभंगुर जीवन से तुम्हारा संबंध टूट जाएगा। तुम उस जीवन को जानोगे जो जन्म के भी पहले है और मृत्यु के भी बाद है। हजारों होंगे प्रमाण--लेकिन छलांग लगे तो।
तैयारी है तो शर्त न लगाओ। शर्त लगाते हो तो तैयारी नहीं है।
प्रेम में कोई शर्त कहता है?
और परमात्मा तो चुप है। कौन उत्तर देगा? मौन उसकी भाषा है। तुम पूछते रहोगे: क्या तुमने मुझे पुकारा? आकाश शांत रहेगा, उत्तर न आएगा। तुम बैठे-बैठे ही मर जाओगे।
हृदय में भाव उठा है, छलांग लो। खोओगे क्या? तुम्हारे पास खोने को क्या है? पा सकते हो, खोने को तो कुछ भी नहीं है।
🌹 !! ओशो प्रेम !! नमन!! 🌹
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