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एक मात्र कल्पना है कि ध्यान में डूबने पर ऐसा होगा, वैसा होगा.......जो ध्यान को यथार्थ में उतार लेता है वो व्यक्ति असामान्य हो जाता है, वो अलग सा दिखता है भीड़ से जैसे हमारे सांसारिक समझदारो से एक पागल भिन्न सा दिखाई देता है.......जबकि जो आध्यात्मिक क्षेत्र के समझदार होते हैं वो उसे पहचान पाने की क्षमता रखते हैं......!!

बुद्ध वाणी

आत्मवत सर्वभूतेषु 🌹

अब इनको शाकाहार में अड़चन मालूम हो रही है! क्योंकि ये कहते हैं, "शास्त्र कहते हैं कि जीव ही जीव का आहार है।"

प्रेम ही आँख हैं.. 💕🌸💕

आनंद शीला 1981 से 1985 तक ओशो रजनीश की सचिव थी। इन चार साल में उसने ओशो को कई बार मारने का प्रयास किया। यही नहीं, ओशो तक पहुंच बनाने और कम्यून की सर्वेसर्वा बनने के लिए उसने ओशो संन्यासियों को धीमा जहर देकर मारने का भी प्रयास किया।

पास लोग आते हैं सारी दुनिया से और उनमें से न मालूम कितने लोग मुझसे आ कर कहते हैं, अक्सर, कि क्या बात है, भारतीय लोगों में कोई रस नहीं मालूम होता ध्यान में? क्या बात है? उनके भीतर कोई अभीप्सा नहीं मालूम होती! कोई उत्कृष्ट आकांक्षा नहीं मालूम होती!

आदमियों पर अदालत में मुकदमा था। मजिस्ट्रेट ने पूछा कि भई, बताओ भी तो, झगड़ा किसलिए हुआ? मार-पीट किसलिए हुई? सिर कैसे खुल गए, लहू कैसे बह गया? और तुम दोनों पुराने दोस्त हो! तो वे दोनों एक-दूसरे से कहें कि भइया, तू बता

The only country in the world which has

मेरे इस 40 साल के दुनिया के अनुभव से मैं आप मेरे मित्रों को यह बात शेयर कर रहा हूं कि इस जमाने में सिर्फ झूठ सिर्फ झूठ और से झूठ चलता है

जो हां नहीं कहता, जो ना नहीं कहता, लेकिन पूरी तरह से व्यक्त